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Sunday, March 31, 2019

output devices

आउटपुट डिवाइस 

मॉनिटर आउटपुट की सॉफ्ट कॉपी को डिस्प्ले करने के लिए सबसे लोकप्रिय डिवाइस एक मॉनिटर है यूजर मॉनिटर के साथ आउटपुट को स्क्रीन पर देख , पढ़ सकता है। 


CRT मॉनिटर :- CRT मॉनिटर एक परम्परागत आउटपुट डिवाइस रहा है।  ये एक टीवी के समान होता है।  एक CRT मॉनिटर एक बड़ी केथोड रे ट्यूब होती है जो की अलग अलग पावर की इलेक्ट्रान बिमा का उपयोग करके स्क्रीन के ऊपर पिक्चर बनती है मॉनिटर स्क्रीन का आकार विकर्ण रूप में इंच में मापा जाता है।   मॉनिटर का रिज्युलेशन पिक्सल्स में मापा जाता है।  एक मॉनिटर कियने पिक्सल्स स्क्रीन पर हॉरिजॉन्टली एवं वर्टिकली प्रदर्शित कर सकता है।  ये उसका रिज्युलेशन कहलाता है।  उदाहरण के तोर पर 800 X 600 , 1024 X 768 आदि।  पिक्सल्स बहुत ही छोटे डॉट्स से बने होते है।  जिन्हे मिलकर हम किसी भी इमेज को स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जा सकता है।  स्क्रीन पर डॉट्स के बिच की रिक्त जगह को डॉट्स पिच कहा जाता है। एक स्क्रीन में जितने छोटे डॉट पिच होंगे। उस स्क्रीन पर पिक्चर की क्वालिटी उतनी ही बेहतरीन होगी। 

फ्लेट पैनल मॉनिटर :- एक फ्लेट पैनल मॉनिटर आम तोर पर कंप्यूटर से आउटपुट प्रदर्शित करने के लिए एक एलसीडी का उपयोग करता है।  एलसीडी कई पतली परतो से मिलकर बनती है , जब प्रकाश इन परतो से गुजरता है।  तो ये प्रकाश का ध्रवीकरण करती है।  एक परत का ध्रवीकरण , जिसमे की लम्बे पतले अणु होते है।  जिसके क्रिस्टल डिस्प्ले कहा जाता है को पिक्सेल लेवल पर नियंत्रित किया जा सकता है। जिससे पिक्सेल को हल्का या गहरा बनाया जा सकता है।  एलईडी प्लाज्मा डिस्प्ले भी एक फ्लेट पैनल तकनीक ही है जो की आजकल सबसे अधिक इस्तेमाल की जाती है।  विशेष रूप से लैपटॉप में 

सीआरटी मॉनिटर की तुलना में फ्लेट पैनल बहुत हल्का होता है।  आज जो सबसे अधिक और नवीनतम एलसीडी उपयोग की जाती है।  उसमे थीं फिल्म ट्रांजिस्टर का उपयोग में लिया जाता है।  एवं हर एक पिक्सेल को नियंत्रित किया जाता है।  इसलिए पिक्चर क्वालिटी व्यइंग एंगल बहुत बेहतर हुआ है।  एलईडी मॉनीटर्स लाइट एमिटिंग डायोड यूज करते है , जो मॉनिटर में परफॉरमेंस बूस्टर का काम करती है।  एलईडी मॉनिटर मूल रूप से एलईडी मॉनिटर है।  जिसमे एलईडी बैकलाइट लगा हुआ है।  जो एलईडी पैनल को रौशनी शक्ति प्रदान करती है। 

प्रिंटर :-  प्रिंटर इनफार्मेशन को स्थायी पठनीय प्रारूप में प्रदान करता है।  जिसे हम हार्ड कॉपी कहते।  है आम तोर पर आउटपुट एक कागज पर छपा होता है।  प्रिंटर आउटपुट की क्वालिटी डीपीआई में मापी जाती है।  प्रिंटर को मोटे तोर पर इम्पैक्ट और नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर में वर्गीकृत किया जा सकता है। 

प्लॉटर :- प्लॉटर का उपयोग इंजीनियरिंग की उच्च गुणवत्ता अली कलाकृतियों , बिल्डिंग प्लान , सर्किट डाइग्राम , आदि को प्रिंट करने के लिए किया जाता है।  ये प्रिंटर ग्राफिक्स एवं कलाकृतियों को इंक पेनस या इंकजेट की मदद से प्रिंट करते है।  यह आमतौर पर ड्रम प्लॉटर और फ्लैट बम प्लॉटर होते है। 

स्पीकर :- यह मल्टीमीडिया कंप्यूटर का एक हिस्सा है।  स्पीकर ध्वनि विस्तारक का इस्तेमाल करते है। जो कम्पन के द्वारा ध्वनि का निर्माण करते है।  और ऑडियो आउटपुट प्रदान करते है।

मल्टीमीडिया प्रोजेक्टर :- लोगो की एक बड़ी संख्या के लिए कंप्यूटर आउटपुट प्रदर्शित करने के लिए , मल्टिमीडिया प्रोजेक्टर का इस्तेमाल किया जाता है।  यह व्यापक रूप से मीटिंग्स और कांफ्रेंस के दौरान प्रेजेंटेशन दिखाने के लिए उपयोग में लिया जाता है। 

इम्पैक्ट प्रिंटर

करैक्टर प्रिंटर :- इस प्रकार के प्रिंटर आम तोर पर एक समय में एक करैक्टर प्रिंट कर सकते है।  करैक्टर प्रिंटर के सबसे लोकप्रिय उदाहरण डॉट मेट्रिक्स पिंटर और डेज़ी व्हील प्रिंटर है।  डॉट मेट्रिक्स प्रिंटर प्रिंट हैडर में छोटे छोटे एलेक्ट्रोमग्नेटिकली सक्रिय पिन होते है।  और साथ में एक इंक वाला रिब्बन होता है। जो इम्पैक्ट में इमेज बनता है।  ये प्रिंटर आम तोर पर धीमे होते है।  और शोर भी करते है।  इन प्रिंटरों का इस्तेमाल बड़े बड़े व्यापारिक या व्यवसायिक काम काज में किया जाता है  जहा 80 और 132 कॉलम के पेजो पे सतत मुद्रण की जरूरत होती है। 

लाइन प्रिंटर :- लाइन प्रिंटर एक समय में एक पूरी लाइन प्रिंट करता है।  परम्परागत रूप से लाइन प्रिंटर , चैन प्रिंटर , ड्रम प्रिंटर के रूप में वर्गीकृत किये जा सकते है।  इस प्रकार के प्रिंटर में एक प्रिंट हेड का उपयोग होता है जो की बहुत साड़ी पिनो के विधुत यांत्रिकी द्वारा पेपर तथा प्रिंट हेड के मध्य उपस्थित एक रिबन के बार बार छूने से वांछित अक्षरों को पेपर पर प्रिंट आकर देती है।  इसकी गति प्रिंटर के गुणों के अनुसार 200 से 2000 लाइन प्रति मिनट हो सकती है। 

  1. नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर :- आमतौर पर नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर ज्यादा तेज़ी से प्रिंट करते है।  नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर , इम्पैक्ट तुलना में और बिना आवाज या कम आवाज के साथ काम करते है।  ये करैक्टर को प्रिंट करने के लिए इम्पैक्ट वाली डिवाइस का उपयोग भी करते है।  कुछ लोकप्रिय नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर निचे दिए गए है। 
  2. इंक जेट प्रिंटर :- घर में उपयोग के लिए प्रिंटर का सबसे आम प्रकार कलर इंक जेट प्रिंटर है।  ये प्रिंटर , प्रिंट हेड से इंक की छोटी बूंदों के स्प्रे के द्वारा पेज की इमेज का निर्माण करते है।  रंगीन इमेज बनाने के लिए प्रिंटर को इंक के कई रंगो की जरूरत होती है।  ये प्रिंटर अपेक्षाकृत सस्ता होते होते है , लेकिन प्रिंटर में यूज होने वाले कंसुमेबल जैसे प्रिंटर काट्रिज की लगत उन्हें लम्बे समय के उपयोग के हिसाब से महंगा बना देती है। 
  3. लेज़र प्रिंटर :- लेज़र प्रिंटर कार्यालय और व्यावसायिक प्रयोजनो के लिए अछि क्वालिटी इमेजेज का उत्पादन करता है।  लेज़र प्रिंटर में फोटोसेंसिटिव सामग्री के साथ लेपित ड्रम को चार्ज किया जाता है।  उसके बाद एक लेज़र या एलईडी द्वारा ड्रम और कागज पर जमा हो जाता है।  और हीट के कारण कागज से जुड़ जाता है।  ज्यादातर लेज़र प्रिंटर मोनोक्रोम होते है।  परन्तु अधिक महंगे लेज़र प्रिंटर एक से अधिक रंग वाले टोनर कार्टेज वाले भी होते है।  इन प्रिंटरों की गति को पेजेज प्रति मिनट में मापा जाता है। 
  4. थर्मल प्रिंटर :- यह स्पेशल पेपर पर प्रिंट करने के लिए गर्म तत्वों का उपयोग करता है।  इसका सबसे ज्यादा उपयोग एटीएम से निकलने वाली रसीद की छपाई में किया जाता है हिट संवेदनशील कागज का प्रयोग किया जाता है।  इसकी मुद्रण लगत अधिक है इसलिए केवल पेशेवर कला और डिज़ाइन के लिए इस्तेमाल किया जाता। है  


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कंप्यूटर सिस्टम

कंप्यूटर अपने आसपास के वातावरण से बातचीत करने के लिए कंप्यूटर पेरिफेरल्स या इनपुट आउटपुट डिवाइस का उपयोग करता है। 
कम्प्टूयर पेरिफेरल्स को मोठे तोर पर तीन श्रेणियो इनपुट आउटपुट डिवाइस और इनपुट / आउटपुट डिवाइस में विभाजित किया जा सकता है।

इनपुट डिवाइसेस :-

कंप्यूटर कीबोर्ड सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले इनपुट डिवाइस में से एक है जिसके द्वारा संख्या अक्षर और विशेष करक्टेर को कपूर में इनपुट किया जाता है।  कीबोर्ड कंप्यूटर को किसी विशेष कार्य आदेशित करने केलिए भी किया जा सकता है।  एक कीबोर्ड में अल्फबेटिक , न्यूमरिक के होती है किसका उपयोग टेक्स्ट एवं न्यूमेरिक डाटा को इनपुट करने के लिए किया जाता है।  कीबोर्ड पर कई तरह की एडिटिंग किज एवं फंक्शन किज होती है जो की सीधे फंक्शन को शुरू करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।  कैप्स लॉक , नम लॉक , स्क्रॉल लॉक किज को टॉगल किज कहा जाता है।  जो किसी विशेष फीचर को ऑन ऑफ करने लिए इस्तेमाल होती है।  Ctrl / Alt किज को कॉम्बिनेशन किज भी कहा जाता है क्यों की यह अधिकांश की बोर्ड नम्बर्स इनपुट करने के लिए अलग संख्यात्मक पेड अनुभाग के साथ आते है।
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पॉइंटिंग डिवाइस :-

ग्राफिकल यूजर इंटरफेस , जो की बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाते है , स्क्रीन पर कर्सर की स्थिति बताने के लिए पॉइंटिंग डिवाइस की आवश्यकता होती है।  पॉइंटिंग डिवाइस निमपरकार से है , जैसे : माउस ट्रैकबॉल , टचपैड , ट्रेक बिंदु , ग्राफिक्स टेबलेट , जॉयस्टिक एवं टच स्क्रीन।  अधिकतर पॉइंटिंग डिवाइस कम्प्टूयर से एक यूएसबी पोर्ट के माध्यम से जुड़े होते है। 

माउस :- माउस सबसे लोकप्रिय पॉइंटिंग डिवाइस है जो यूजर एक हाथ के साथ कार्य को मूव करता है।  पुराने माउस में एक बॉल होती थी।  जो की माउस के निचले भाग की सतह पर होती थी।  उसमे आंतरिक रोलर्स बाल के मूवमेंट को सेन्स करके माउस कोर्ड के माध्यम से कंप्यूटर को संचारित करते थे।  आजकल ऑप्टिकल माउस के प्रचलन है।  जिसमे रोलिंग बॉल का उपयोग नहीं किया जाता है।  बल्कि इसके स्थान पर एक प्रकाश और छोटे सेंसर का उपयोग किया जाता है , जो मेज की सतह के एक छोटे से भाग से माउस की मूवमेंट का  लिए इस्तेमाल होता है।  यह तार रहित या वायरलेस माउस रेडिओ तरंगो के माध्यम से कंप्यूटर के साथ संचार बनाए रखता है

माउस में स्क्रॉल व्हील्स भी हो सकते है जो की जीयूआई के साथ काम करने में सहायक सिद्ध हो सकते है।  पारम्परिक पीसी माउस में दो बटन होते है। जबकि मैकिनटोश माउस में एक ही बटन होता है। 

टचपैड :- आजकल अधिकांश लैपटॉप कम्प्टूयर में एक टच पेड पॉइंटिंग डिवाइस होती है। यूजर टचपैड की सतह पर उंगली को फिरकर या फिसला कर स्क्रीन पर कर्सर को एक जगह से दूसरी जगह पर मूव करते है लेफ्ट एवं राइट क्लिक बटन पर पेड के नीच स्थित होते है।  टचपैड इस्तेमाल करने के लिए माउस की अपेक्षा बहुत काम जगह की जरूरत पड़ती है।  और इनमे कोई मूविंग भाग नहीं होता है। 

ट्रेक पॉइंट :- आईबीएम थिंक पेड जिसमे प्राय:एक ट्रेक पॉइंट होता है जो की एक छोटी रबर प्रोजेक्शन कीबोर्ड के बिच एम्बेडेड होता है।  ट्रेक पॉइंट एक छोटे जॉयस्टिक की तरह कार्य करता है।  इसे कर्सर की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 

ट्रेक बॉल :- ट्रैकबॉल भी एक माउस की तरह होता है , जिसमे बॉल शीर्ष पर स्थित होता है।  हम ट्रैकबॉल को रोल करने के लिए उंगलियों का उपयोग करते है और आंतरिक रोलर्स इस मूवमेंट को सेन्स करके निर्देशों को कंप्यूटर तक पहुँचाते है।  ट्रैकबॉल डेस्क पर स्थिर बनी रहती है , और इसके वजह से हमे ट्रैकबॉल का उपयोग करने के लिए ज्यादा जगह की जरूरत भी नहीं होती है. आजकल ऐसे ऑप्टिकल ट्रैकबॉल उपलब्ध है जिनमे रोलर्स की जरूरत नहीं होती है , जिससे व्हील्स के गंदे होने की भी कोई समस्या नहीं होती है। 

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जॉयस्टिक्स :- जॉयस्टिक्स और दूसरे गेम नियंत्रक भी पॉइंटिंग डिवाइस के रूप में कंप्यूटर से जोड़े जा सकते है।  वे आमतौर पर खेल के लिए उपयोग किए जाते है।

ग्राफिक्स टैबलेट :- ग्राफिक्स टैबलेट में इलेक्ट्रॉनिक लेखन क्षेत्र होता है जिसमे स्पेशल पेन को यूज किया जाता है।  ग्राफिक्स टैबलेट के द्वारा आर्टिस्ट ग्राफिकल इमेजेज बना सकता है।  ग्राफिक्स टेबलेट का पेन दबाव के प्रति सवेदनशील होता है।  जिसके परिणाम स्वरूप ज्यादा या कम दबाव पड़ने पर वो अलग अल चौड़ाई के ब्रश स्ट्रोक प्रदान करता है। 

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स्कैनर :- एक स्कैनर मुद्रित पृष्ठ या ग्राफिक का डिजिटलीकरण करता है।  उसके छोटे छोटे पिक्सल्स वाली इमेज में परिवर्तित केके कम्प्टूयर को संचारित करता है।  यह लेजर तकनीक उपयोग करके प्रिंटेड इनफार्मेशन को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में परिवर्तित करता है।  स्केनर किसी भी तरह की इनफार्मेशन को स्कैन कर सकता है जिसे हाथ से लिखा हुआ टेक्स्ट , इमेज , चित्र , प्रिंटेड पेज आदि।  एक बार स्कैन होने के बाद स्केंनड इनफार्मेशन को कम्प्टूयर में स्टोर किया जा सकता है या फिर प्रिंटर के द्वारा प्रिंट किया जा सकता है। 

मिडी ( MIDI ) :- मिडी (म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट डिजिटल इंटरफ़ेस ) - एक प्रणाली है जो इलेक्ट्रॉनिक संगीत वाद्य यंत्र के बिच सुचना प्रसारित करने के लिए डिजाइन किया गया है।  इनके द्वारा मिडी की बोर्ड को कम्प्टूयर से जोड़ा जा सकता है एक कलाकार कम्प्टूयर सिस्टम द्वारा कैप्चर किए गए संगीत को प्ले कर सकता है। 

मैग्नेटिक इंक करैक्टर रेकोग्निशन ( MICR ) :- MICR कोड एक करैक्टर पहचाने की तकनीक है , जो मुख्या रूप से बैंकिंग उधोग द्वारा प्रोसैसिंग को काम करने तथा अन्य दस्तावेज़ों की क्लियरिंग में काम आता है।  यह एमआईसीआर कोड करैक्टर को डिजिटल डाटा में बदल देता है।  जो कंप्यूटर समझ सकता है। 

ऑप्टिकल मार्क रीडर ( OMR ):- यह एक विशेष स्केनर है जो पेन्सिल या पेन द्वारा किए गए निशान के एक पूर्व निर्धारित प्रकार की पहचान करने के लिए उपयोग होता है। शबे आम उदाहरण परीक्षाओ में प्रयोग किए जाने वाली उत्तर पुस्तिका , ओएमआर उत्तर पुस्तिका को स्कैन कर आउटपुट के रूप में परिणाम का उत्पादन करने लिए प्रयोग किया जाता है।  ओएमआर सर्वेक्षण , चुनाव और परीक्षणों में भी प्रयोग किया जाता है। 
माइक्रोफोन :- माइक्रोफोन एक इनपुट डिवाइस है जिसका इस्तेमाल ऑडिओ डेटा को कंप्यूटर में इनपुट के लिए किया जाता है यह एक वायर के द्वारा कंप्यूटर से जुड़ा होता है जिसमे एक माउथपीस जैसी डिवाइस को ऑडिओ करने के लिए उपयोग किया जाता है। 


वेब कैम :- यह कंप्यूटर से जुड़ा डिजिटल कैमरा है और कंप्यूटर के माध्यम से कंप्यूटर नेटवर्क में इमेजेज , वीडियो को कैप्चर करके कंप्यूटर में फीड करने में काम आता है। डिजिटल कैमरा इनपुट वस्तु पर फॉक्स कर के पिक्चर लेता है।  और उसको डिजिटल रूप में परवर्तित करता है।  जिससे उसे कंप्यूटर में स्टोर किया जा सके।  

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